घर आया पोस्टकार्ड भी है आपका एड्रेस प्रूफ
- अंचल ओझा, अम्बिकापुर
अम्बिकापुर/अब आपकी वोटर परिचय पत्र बनवाने की प्रक्रिया और भी आसान हो गई है। देश की काफी बड़ी संख्या का वोटर परिचय पत्र नहीं बन पाने और इसकी जटिल प्रक्रिया पर गंभीर चुनाव आयोग ने निर्णय लिया है कि अब लोगों में अत्यधिक जागरूकता उत्पन्न की जायेगी और वोटर परिचय पत्र बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाया जायेगा। चुनाव आयोग का कहना है कि देश के कई हिस्सों से भारी संख्या में लोग अपने गांव-शहर छोड़ कर, दूसरे राज्य व शहर में रोजी-रोटी हेतु जाते हैं। जिसके कारण उनके स्थायी निवास स्थल पर उनका वोटर परिचय पत्र नहीं बन पाता। जबकी वर्तमान स्थिति में जहां पर निवास करते हैं, वहां पर मकान मालिकों की मनमानी और मांगे जाने पर भी एड्रेस प्रूफ के नाम पर कुछ नहीं देने के कारण देश की काफी बड़ी संख्या का वोटर परिचय पत्र नहीं बन पाता और ये लोग वोट देने से वंचित हो जाते हैं।
चुनाव आयोग का कहना है कि कई बार तो ऐसा होता है कि लोगों को एड्रेस प्रूफ बनवाने के लिये अपने मकान मालिक से गुहार लगानी पड़ती है और अकारण एफिडेविट बनवाने के नाम पर दलालों के चक्कर में पड़कर 50 से 200 रूपये गवांना पड़ता है।
चुनाव आयोग ने कहा है कि वास्तव में यह समस्या स्थानीय चुनाव कार्यालयों, वोटर परिचय पत्र बनाने वाले अकिधकारियों व जनता की जागरूकता के कारण उत्पन्न हुई है। जबकी वोटर पहचान पत्र बनवाने हेतु फार्म नम्बर 6 में एड्रेस के लिये कोई सरकारी दस्तावेज (पानी के बिल, टेलीफोन बिल, ड्रायविंग लायसेंस सहित अन्य दस्तावेज) नहीं होने पर पहचान-पत्र बनवाने वाले व्यक्ति के घर पर आया हुआ पोस्टकार्ड सरकारी दस्तावेज व एड्रेस प्रूफ माना गया है। इसके लिये यह जरूरी नहीं की संबंधित व्यक्ति को कोई दूसरा व्यक्ति ही पोस्टकार्ड भेजे तो ही मान्य होगा, नियम में साफतौर पर यह दर्शाया गया है कि वोटर पहचान पत्र बनवाने की प्रक्रिया में आपको एड्रेस प्रुफ देने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि आपके पास एड्रेस प्रूफ के तौर पर जमा कराने के लिये कोई दस्तावेज नहीं, तो आप केवल 50 पैसे खर्च करके अपने पते पर पोस्ट कार्ड पोस्ट करे दंे। जब डाकिया आपके घर पर उस पोस्टकार्ड को लेकर आये, तब इसे आप वोटर पहचान पत्र बनवाने हेतु फार्म नम्बर 6 भरते समय एड्रेस प्रूफ के तौर पर जमा करा सकते हैं। चुनाव आयोग ने यह साफ किया है कि यह नियम किराये के मकान में रहने वाले लोगों के साथ ही स्थायी निवासियों के लिये सभी पर लागू होगा।
चुनाव आयोग का यह निर्णय तब आया है कि जब कि दूसरे राज्यों से जाकर दिल्ली, मुम्बई, बंगलौर जैसे मैट्रो शहरों में काम की तलाश में पहुंचे लोगों का वोटर परिचय पत्र नहीं बन पा रहा था और लोगों ने इस बावत् शिकायत की थी, जिसके बाद दिल्ली की चुनाव आयुक्त ने इस संबंध में जरूरी दिशा निर्देश देते हुए वोटर परिचय पत्र बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु दिशा निर्देश दिया और लोगों में जागरूकता हेतु आवश्यक कदम उठाने की बात कही।
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